डिजिटल डेस्क मुंबई: यह एक खबर नहीं एक सबक है उन लोगों के लिए जो अकेलेपन से परेशान हैं और अपने अकेलेपन का इलाज या समाधान डिजिटल दुनिया में ढूंढते हैं। और इस डिजिटल दुनिया में क्या हकीकत है? और, क्या आभासी हैं? क्या सही है? और, क्या गलत है? कौन व्यक्ति वास्तव में भावनाओं को समझता है और कौन भावनाओं से खिलवाड़ कर सकता है। इसके बारे में कोई भी जानकारी नहीं होती लेकिन जो कितना सकारात्मक और अपनापन दिखाकर आपके अकेलेपन को दूर करने की कोशिश कर रहा है। तो समझ लें की कहीं न कहीं कुछ न कुछ गड़बड है। हमारा उद्देश्य आपको डराना नहीं बल्कि सावधान करना है और जो कहानी हम बताने जा रहे हैं उसको पूरी तरह पढ़ें और समझें तो निश्चित ही आने वाले समय में आप इस तरह के डिजिटल फ्रॉड से बच सकते हैं।
सोशल मीडिया पर हुई एक अनजान दोस्ती ने मुंबई के एक 80 साल के बुजुर्ग की जिंदगी ही नहीं बल्कि उसके पूरे परिवार को बुरी तरह हिला दिया। बुजुर्ग की पत्नी का देहांत हो चुका था। बेटा और बहू अपने काम में व्यस्त रहते थे। बुजुर्ग अकेलेपन का शिकार था। और इस अकेलेपन को मिटाने के लिए उसने सहारा लिया सोशल मीडिया का। बुजुर्ग ने अपना प्यार तलाश करने की कोशिश की एक साथ ही तलाश करने की कोशिश की। और उसकी इस खोज में एक के बाद एक शार्वी कविता, दिनाज और जैस्मीन नाम की चार महिलाओं की एंटी होती है।

एक के बाद दूसरी, तीसरी और फिर चौथी महिला के चक्कर में पड़कर इस शख्स ने 21 महीने में अपने जीवनभर की पूरी कमाई लगभग 9 करोड़ रुपये गंवा दिये। खुद की पूरी पूंजी खत्म हो जाने पर जब बेटे और बहू से भी पांच लाख रुपये मांगा तब पूरी ठगी का खुलासा हुआ। इसके बाद बुजुर्ग को समझ में आया कि उन्हें प्यार के नाम पर ठगा गया है। इसके बाद वह पुलिस के पास पहुंचे और अपनी पूरी ठगी की वारदात बताई। साइबर पुलिस ने केस दर्ज कर ठगी के इस मामले में जांच शुरू कर दी है। पुलिस सबसे पहले यह पता लगाने में जुटी है कि क्या बुजुर्ग को 21 महीने में 4 बार ठगने वाला एक ही आरोपी है, या अलग-अलग लोगों ने उन्हें ठगा।
अप्रैल 2023 में शिकायतकर्ता ने फेसबुक पर शारवी नाम की एक महिला को दोस्ती का रिक्वेस्ट भेजी थी। दोनों एक-दूसरे को नहीं जानते थे और शारवी ने उनकी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं कीव लेकिन कुछ दिनों बाद, शार्वी ने बुजुर्ग को वापस एक रिक्वेस्ट भेजी और उन्होंने इसे एक्सेप्ट कर लिया। दोनों ने ऑनलाइन चैट करना शुरू कर दिया और बाद में व्हाट्सएप नंबर एक्सचेंज हो गए. शारवी ने कहा कि वह अपने पति से अलग हो गई है और अपने बच्चों के साथ रहती है। उसने धीरे-धीरे अपने बच्चों की बीमारी का बहाना करते हुए बुजुर्ग से पैसे मांगने शुरू कर दिये और उन्होंने पैसे दे दिए।
बुजुर्ग के साथ शारवी की बातचीत चल रही थी, इस बीच अश्लील मैसेज के साथ कविता की एंट्री हुई। कविता नाम की एक महिला ने बुजुर्ग को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा। कविता ने बताया कि शार्वी ने उसे उनका नंबर दिया है। कविता सीधे मुद्दे पर आई और बोली कि उस दोस्ती करना चाहती है। बुजुर्ग ने इस मौके को भी नहीं छोड़ा। कविता ने अश्लील मैसेज भेजकर नज़दीकियां बढ़ाईं और फिर वही पुराना फॉर्मूला बीमार बच्चों के इलाज के लिए पैसों की डिमांड की. कविता को भी बुजुर्ग ने पैसे देने शुरू कर दिये।
दिसंबर 2023 में एक और नई किरदार आई दिनाज़, जिसने खुद को शारवी की बहन बताया और कहा कि शारवी अब इस दुनिया में नहीं रही। दिनाज़ ने बताया कि मरने से पहले शार्वी चाहती थी कि बुजुर्ग उसका हॉस्पिटल बिल भरें। दिनाज़ ने व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी भेजे और पैसे ऐंठ लिए। बाद में जब बुजुर्ग ने पैसे लौटाने की बात कही तो दिनाज़ ने खुदकुशी की धमकी दे डाली। इसके बाद जैस्मीन नाम की महिला ने खुद को दिनाज़ की दोस्त बताया और मदद की गुहार लगाई। बुजुर्ग ने उसे भी पैसे भेजे। जब बुजुर्ग की सारी सेविंग्स खत्म हो गईं, तो उन्होंने अपनी बहू से ₹2 लाख उधार लिए, लेकिन मांगें थमती नहीं दिखीं। अप्रैल 2023 से जनवरी 2025 तक बुजुर्ग ने कुल 734 बार पैसे भेजे, जिसकी कुल रकम पहुंच गई ₹8.7 करोड़।

बुजुर्ग ने जब अपने बेटे से ₹5 लाख मांगे. बेटे को शक हुआ और उसने पूरा मामला पूछ लिया. जब बुजुर्ग ने सच बताया, तो बेटे के होश उड़ गए। प्यार, हमदर्दी और झूठी मजबूरियों के नाम पर बुजुर्ग से करीब ₹8.7 करोड़ ठग लिए गए और वो भी 21 महीनों में 734 ट्रांजैक्शन के जरिए। प्यार की तलाश ऑनलाइन करना इतना महंगा पड़ सकता है, ये शायद ही कभी महाराष्ट्र के मुंबई में एक 80 साल के शख्स ने सोचा होगा। फेसबुक का फर्जी प्यार इस परिवार को नौ करोड़ रुपए महंगा पड़ा। 22 जुलाई 2025 को बुजुर्ग ने साइबर हेल्पलाइन ‘1930′ पर शिकायत की और फिर 6 अगस्त को कंट्रोल रूम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।
यह खबर नहीं सबक है। यह हम पहले ही आपको बता चुके हैं। तो यह सबक है कैदी आपके परिवार में चाहे बच्चे हों चाहे बुजुर्ग हो चाहे महिला हो यदि वह अकेलेपन का शिकार है और मोबाइल में ही डूबे रहते हैं तो उनके अकेलेपन का सहारा सोशल मीडिया को कभी न बनने दें। क्योंकि सोशल मीडिया पर ऐसे तमाम फ्रॉड्स ने इस तरह के फर्जी अकाउंट बना रखे हैं। यह आपकी भावनाओं से खिलवाड़ करते हैं।आपकी मजबूरियों का फायदा उठाते हैं। जो व्यक्ति अकेलापन झेल रहा है उसे भी समझना होगा कि सोशल मीडिया की दुनिया इतना विश्वास योग्य नहीं है। अपने डर अपने लालच और अपनी भावनाओं पर काबू रखना यदि आप यह कर पाएंगे निश्चित ही कभी भी डिजिटल फ्रॉड।के शिकार नहीं होंगे।
