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सीएसआईआर के एक्सपर्ट्स का शहर के इंजीनियर, प्लानर के मुंह पर तमाचा, जर्जर सड़क घटिया ड्रेनेज पर कह दी बड़ी बात

कितने शर्म की बात है कि सी आइएसआर और सीआरआरई के एक्सपर्ट्स विज्ञानी हमारे शहर के कथित एक्सपर्ट्स के मुँह पर साफ कहकर चले गए कि आप लोगों की प्लानिंग गलत है। तो सवाल यह उठता है कि हमारे शहर में है सड़क निर्माण और ड्रेन व्यवस्था की प्लानिंग करने वाले लोग क्या पढ़े लिखे नहीं हैं क्या

ग्वालियर मध्य प्रदेश: लंबे समय से ग्वालियर घटिया सड़कों और को नियोजित ड्रेनेस सिस्टम की समस्या से जूझ रहा है। बारिश में तो हाल बद से बदतर हो जाते हैं और इस साल बारिश के मौसम ने सड़कों और डेनिस सिस्टम की जो पोल खोली है उससे पूरे देश में ग्वालियर के जिम्मेदारों की किरकिरी हुई है। ज्यादातर मामलों में ऐसे घटिया ड्रेनेस सिस्टम और सड़कों का। निर्माण करने के पीछे मुख्य जिम्मेदार विभाग नगर निगम ग्वालियर समस्याओं को फुटबॉल बनाता रहा और ऊटपटाँग जवाब देकर इतिश्री करता रहा। लेकिन किस तरह से अयोग्य लोगों द्वारा सिटी? की प्लानिंग की गई है। किस तरह नाकारा लोगों द्वारा सड़कों का निर्माण किया गया है और किस तरह की तकनीकी कमियां कागजी शिक्षित लोगों ने छोड़ दी हैं, इसका खुलासा अभी हाल ही में सीएसआईआर के विशेषज्ञों ने ग्वालियर दौरे के दौरान कर दिया। 

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद और केंद्र सडक अनुसंधान संस्थान की 4 सदस्यीय टीम इस समय ग्वालियर दौरे पर हैं। यह टीम ग्वालियर की सड़कों और ड्रेनेस समस्या पर अध्ययन कर रही है, और उनके कारणों का पता लगा रही है। इस टीम में शामिल मुख्य विज्ञानी सुनील जैन कँवर सिंह मनोज शुक्ला और संपत कुमार ने ग्वालियर की सड़कों और ड्रेनेस सिस्टम पर अध्ययन किया। टीम सुबह 11 बजे आनंदनगर ट्रांसपोर्ट नगर शताब्दी पुरम सन् वैली। सिटी सेंटर एयरटेल ऑफिस लक्कड़ खाना पुल छप्पर वाला पुल और अन्य कुछ क्षेत्रों में पहुंची। टीम में आए हुए एक्सपर्ट्स के सवालों के जवाब हमारे शहर के जिम्मेदार इंजीनियर्स और प्लानर्स ने ऐसे दिए जैसे कोई बैक वेंचर छात्र स्कूल में देता है। या देता भी नहीं है सवाल पर चुप खड़ा हो जाता है। 

तमाम क्षेत्रों में जलभराव को देखकर जब इस विशेषज्ञ टीम के सदस्यों ने जलभराव का कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि सड़क के बगल से नाला है और जब विशेषज्ञों ने पूछा की नाले की निकासी कहाँ है तो इस बात का जवाब हमारे शहर के जिम्मेदार इंजीनियरों पर नहीं था। टीम में आए एक्सपर्ट्स ने बड़े ही कौतूहल के साथ जिम्मेदार इंजीनियर्स से पूछा कि क्या इस शहर में सडक के किनारे नालियां नहीं बनाई जाती तो इंजीनियर समस्या का ठीकरा कचरे और मिट्टी पर देने लगे। शताब्दी पुरम में नो हंड्रेड एमएम की लाइन में कचरा मलबा भरा हुआ था जिसके चलते क्षेत्र में जल भराव था, मतलब इस लाइन की सफाई ही नहीं की गयी थी। तमाम क्षेत्रों में जर्जर सड़क और जलभराव देखकर टीम में आए एक्सपर्ट सदस्यों ने साफ कहा कि प्लानिंग ही गलत है। 

कितने शर्म की बात है कि सी आइएसआर और सीआरआरई के एक्सपर्ट्स विज्ञानी हमारे शहर के कथित एक्सपर्ट्स के मुँह पर साफ कहकर चले गए कि आप लोगों की प्लानिंग गलत है। तो सवाल यह उठता है कि हमारे शहर में है सड़क निर्माण और ड्रेन व्यवस्था की प्लानिंग करने वाले लोग क्या पढ़े लिखे नहीं हैं क्या उन्होंने इंजिनियरिंग कागजों में की है? लेकिन हमारे शहर के जिम्मेदार एक्सपर्ट्स टीम के सवालों का बेशर्मी से ऊल जलूल जवाब देते रहे। टीम के एक्सपर्ट्स ने साफ कहा कि शहर का ड्रेनेस सिस्टम फेल है और किसकी वजह से फेल? है ये आप समझ ही गये होंगे सड़कों के निर्माण में भी खामियां बताई इसका दोषी कौन है, यह भी आप समझ गए होंगे। अब सवाल यह उठता है कि क्या हमारे शहर को योग्य शिक्षित इंजीनियर्स मिलेंगे जो सही प्लानिंग से अच्छी गुणवत्ता की सड़कों का निर्माण करें और शहर को एक बेहतरीन ड्रेनेज सिस्टम दे पाएं। 

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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