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शराबी चूहे ढक्कन कुतर, पूँछ चाट पी गए शराब, मामला सुन आबकारी अधिकारी भी हुए हैरान

चूहों द्वारा शराब पी जाने का यह अजीबो गरीब मामला झारखंड के धनबाद शहर से आ रहा है। यहाँ शहर के दो शराब ठेकों पर चूहों ने दो चार बोतल नहीं बल्कि पूरे आठ सौ।दो बोतल शराब पीली। आपको बता दें कि बिक्री के लिए ठेकों पर शराब पहुंचाई गई थी

डिजिटल डेस्क धनबाद: शराब के ठेकों से शराब गायब होने के तमाम मामले अभी तक आपने सुने होंगे। लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि शराब ठेकों से बोतलों के अंदर से शराब इसलिए गायब हो गई क्योंकि वह शराब चूहे पी गए हों। जी हां यह बात सच है कि यह शराब खोर शराबी चूहे इतनी सफाई से शराब पी गए कि आप यकीन भी नहीं कर सकते। इन शराबखोर चूहों ने कितनी सफाई से सैकड़ों बोतल शराब गटक ली के पहले तो ठेकेदारों को भी भरोसा नहीं हुआ और जब यह बात आबकारी अधिकारियों को बताई गई तो पहले तो वह भी इस बात पर यकीन नहीं कर पाए लेकिन जब उन्होंने सबूतों की शिनाख्त की तो चुओं की इस शराबखोरी के अंदाज को देखकर वे चौंक भी गए और हँसने भी लगे।

चूहों द्वारा शराब पी जाने का यह अजीबो गरीब मामला झारखंड के धनबाद शहर से आ रहा है। यहाँ शहर के दो शराब ठेकों पर चूहों ने दो चार बोतल नहीं बल्कि पूरे आठ सौ।दो बोतल शराब पीली। आपको बता दें कि बिक्री के लिए ठेकों पर शराब पहुंचाई गई थी और जब यह शराब कम पाई गई तो संचालकों से सवाल पूछा गया और ऐसे में उन्होंने आबकारी अधिकारियों को बताया कि चूहे बहुत हैं और यह चूहे शराब खोर है शराब पीने के आदी हैं। पहले यह चूहे ढक्कन को कुतर। लेते हैं। इसके बाद बोतल में अपनी लम्बी पूँछ डाल लेते हैं और फिर पूंछ चाट चाटकर शराब पीते हैं और वह यह हरकत तब तक करते हैं जब तक पूरी बोतल खाली न हो जाए। आबकारी विभाग को ऐसी आठ सौ दो बोतलें दी गई जिनकी शराब चूहे इसी अंदाज में पी गए। चूहों की धमा चौकड़ी में कुछ बोतलें टूट भी जाती हैं। 

आपको बता दें कि झारखंड में शराब की बिक्री उत्पाद विभाग के अधीन होता है। इसके लिए प्लेसमेंट एजेंसियां नियुक्त की जाती हैं। धनबाद में विभागीय व्यवस्था के तहत ठेकों पर स्टाफ भी विभाग ही उपलब्ध कराता है। रखरखाव व बिक्री का जिम्मा कंपनियों का होता है। अब चूहों की इस हरकत के चलते 802 बोतलों का स्टाक  कम मिला है। खाली बोतलें मिली हैं।शराब कम पाई गई है। इस मामले में सहायक उत्पाद अधिकारी का साह कहना है की शराब कैसे कम हुई है इससे विभाग को कोई मतलब नहीं है स्टॉक से शराब कम मिलती है तो इसकी भरपाई संबंधित कंपनी को करनी होती है। और इस नियम निका का हवाला देकर विभाग ने साफ बता। दिया है के इन शराब और चूहों की इस हरकत का खामियाजा अब कम्पनी को भुगतना होगा। 

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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