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मोटा माल देकर कुर्सी पर बैठे मोटे साहब का मोटा खेल

ग्वालियर मध्य प्रदेश: इस तरह की चर्चाएं आजकल जोरों पर हैं कि कई अधिकारी ऊपर स्तर पर सेटिंग करके कुर्सियां हथिया रहे हैं। यह बात उस समय सही लगती है जब वरिष्ठता क्रम को दरकिनार करते हुए कई जगह पर कनिष्ठ को अयोग्य को और पुराने विवादित अधिकारी को भी किसी विभाग का मुखिया बना दिया जाए। लेकिन आजकल यह प्रक्रिया सामान्य हो चुकी है और पूरे मध्यप्रदेश में कई जगह पर कई विभागों में यह देखा जाता है। ग्वालियर में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। अब हम न तो साहब बताएंगे और न विभाग। लेकिन आप सब समझ जाएंगे। क्योंकि समझने वाले समझ गए हो जो ना समझे वो????

एक मोटे साहब को अपने विभाग का मुखिया बनने का इतना शौक कि वह अपने से संबंधित हर व्यक्ति से कहा कर देते कि कैसे भी में मुखिया बन जाऊं कहीं कितना भी पैसा देना पड़े और आप यकीन मानिए कि इस बात के साक्ष्य भी रिकॉर्डिंग के रूप में उपलब्ध हैं। मोटे साहब जानते हैं कि उनके इस विभाग के मुखिया का पद मोटी कमाई का पद है और यदि वह ऊपर तक सेटिंग करके कुछ माल खर्च कर भी लेंगे तो उतना माल तो वो कुछ ही दिनों में कमा ही लेंगे और बाकी शायद उनकी कमाई के टारगेट इतने हैं कि सात पीढ़ियों के लिए जोड लेने की कहावत शायद उन पर चरितार्थ होती है क्योंकि उनके विभाग के अंदर के ही लोग और उनके विभाग से संबंधित कार्य वाले लोग अब यह कहने लगे हैं कि साहब बहुत लूट रहे हैं हर बात में मोटी रकम मांग रहे हैं। 

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विभाग ऐसा है कि सीधे जनता की सुविधाओं से जुड़ा हुआ है लेकिन जनता को कुछ मिले या न मिले। मोटे साहब का साफ कहना है कि उनको एक मोटा हिस्सा चाहिए। बाकी कुछ भी करें। और यहां सबसे बड़ी बात यह है कि मोटे साहब अपनी छवि को सुधारने के लिए तमाम कार्रवाइयाँ करते नजर आते हैं।लेकिन उनके कार्यवाही के पीछे भी यही बात निकल कर सामने आ रही है कि जहां से हिस्सेदारी नहीं आ रही वहां मोट साहब डंडा चला देते हैं और उनके डंडे। का आतंक इस तरह व्याप्त हो जाता है कि जिन पर कार्रवाई नहीं हुई है वे भी शरणागत हो जाते हैं। 

विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में आपत्ति जता चुके हैं कि उनको छोड़ नियम। विरुद्ध मोटे साहब को मुखिया बना दिया गया है लेकिन यहां मोटा माल चलता है। वहां योग्यता वरिष्ठता और अनुभव कहीं मायने नहीं रखता। और हां यदि किसी जांच एजेंसी में जांच हो भी रही हो तो भी संबंधित मंत्रालय और भोपाल में बैठे आला ऑफिसर खामोश रहते हैं क्योंकि जो मोटा माल विभाग के मुखिया बनने के बाद मोटे साहब के द्वारा वहां तक पहुंच रहा है। वह मुंह में जमे उस दही के समान हैं जो उन्हें खामोश रहने पर मजबूर कर रहा है। लेकिन फिर भी विभाग में परेशान कुछ लोग यह आस लगाए बैठे हैं के देश के कानून के घर में देर है लेकिन अंधेर नहीं और एक न एक दिन तो मोटे साहब के छोटे मोटे सारी कारनामे खुलेंगे। लेकिन वो दिन कब आएगा? यह किसी को नहीं पता…

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Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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