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महाकुम्भ पहुँचेंगे 45 करोड़ लोग, कैसे होती है यह किनती, क्या है तकनीक जानिए

प्रयागराज उत्तर प्रदेश: महाकुंभ एक ऐसा महोत्सव जिसमें तमाम बातों के साथ साथ इस बात की भी चर्चा होती है कि करोड़ों लोग यहाँ इस ऐतिहासिक महाकुंभ का अनुभव को लाभ प्राप्त करने आने वाले हैं। महाकुंभ में पहले दिन डेढ करोड तो मकर संक्रांति के दिन साढ़े चार करोड़ लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई ऐसे आंकड़े मीडिया में सुर्खियों में रहे। जब कभी भी इस तरह के आंकड़े बताए जाते हैं, तो सहज ही मन में एक प्रश्न उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में महाकुंभ पहुंचे लोगों की गिनती कैसे की गई होगी। क्या फ़िजिकली 1 1 व्यक्ति की गिनती किया जाना संभव है। यदि नहीं तो फिर ऐसा क्या तरीका अपनाया जाता है और जो तरीका अपनाया जाता है उसमें इस बात की कितनी सच्चाई है कि जो आंकड़े प्रसारित किए जाते हैं वह सही हो।

महाकुंभ 2025 की बात करें तो इस बार का कुंभ बेहद खास है क्योंकि हर 12 साल बाद लगने वाले इस कुंभ में 144 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, क्योंकि अब तक 12 कुंभ पूरे हो चुके हैं। यही वजह है एक सौ चवालीस साल क्या ऐतिहासिक महाकुंभ होने की वजह से यह अनुमान लगाया गया था कि इस बार महाकुंभ आने वाले लोगों की संख्या पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। अब चुनौती यह थी कि जब इतनी अधिक संख्या में लोग आएंगे तो क्या इनका कहीं पंजीयन? किया जाएगा जिसके माध्यम से इनकी संख्या पता चल सके। तो आपको बता दें कि ऐसा कोई भी लिखित रिकार्ड नहीं बनाया गया है जिसमें पंजीयन के आधार पर महाकुंभ में पहुंचने वाले भक्तगणों की सही संख्या बताई जा सके।

कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की गिनती के लिए यूपी सरकार ने हाईटेक उपकरणों का सहारा लिया है और इस बार AI बेस्ड कैमरे की मदद से लोगों की गिनती की जा रही है। सरकार ने महाकुंभ 2025 में आने वाले श्रद्धालुओं की गिनती करने के लिए एक स्पेशल टीम बनाई है और इस टीम का नाम है क्राउड असेसमेंट टीम। यह टीम रियल टाइम बेसिस पर महाकुंभ में आने वाले लोगों की गिनती कर रही है और इसके लिए ऐसे खास कैमरों की मदद ली जा रही है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से लोगों की गिनती कर रहे हैं। लोगों को स्कैन कर रहे हैं, यह कैमरे महाकुंभ में आने वाले लोगों के चेहरों को स्कैन करते हैं और वहां मौजूद भीड़ के हिसाब से यह अनुमान लगाते हैं कि कितने घंटे में कितने लाख लोग महाकुंभ के मेला क्षेत्र में आए हैं। इस समय महाकुंभ के पूरे मेला क्षेत्र में ऐसे 1800 कैमरे लगे हुए हैं। इसके अलावा यही टीम लोगों की गिनती करने के लिए ड्रोन की मदद ले रही है जिनसे एक निश्चित क्षेत्र में भीड़ के घनत्व को मापा जाता है और यह पता लगाया जाता है कि एक दिन में कितने लोग महाकुंभ के आयोजन में शामिल हो रहे हैं। 

मतलब साफ है कि जो भी संख्या श्रद्धालुओं की प्रतिदिन महाकुंभ दर्शन को लेकर सामने आ रही है। वह तकनीक पर आधारित है और इस हाइटेक तकनीक का प्रयोग किया गया है उसके माध्यम से ही लोगों की गिनती हो रही है। अब यह गिनती कितने प्रामाणिक है? क्या इसमें कोई दोहराव तो नहीं है। डबल काउंट होने की या कुछ काउंट मिस होने की कितनी संभावना है। यह तो विशेषज्ञ ही बता सकते हैं।

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