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टोल प्लाजा कर्मियों ने फौजी को पीटा, गुस्साई जनता ने ऐसे लिया बदला

सैकड़ों ग्रामीण टोल प्लाजा पर एकत्र हुए और धरने पर बैठ गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने टोल प्लाजा को पूरी तरह फ्री करा दिया और किसी भी वाहन से शुल्क नहीं वसूलने दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने टोल प्लाजा पर जमकर तोड़फोड़ कर दी. ग्रामीणों का कहना है कि यदि सेना का जवान सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिकों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

डिजिटल डेस्क मेरठ उत्तर प्रदेश: भूनी टोल प्लाजा पर सेना के जवान कपिल निवासी गांव गोटका के साथ हुई मारपीट का मामला गर्मा गया है। गोटका के सैकड़ों लोगों ने सोमवार को टोल प्लाजा पर हंगामा, तोड़फोड़ और नारेबाजी कर दी। पुलिस ने आकर स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं थे। ग्रामीण टोल वसूली एजेंसी को बर्खास्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

मेरठ के गांव गोटका निवासी कपिल ऑपरेशन सिंदूर के बाद कांवड़ यात्रा के दौरान श्रीनगर से छुट्टी पर आया था। सोमवार को उसे श्रीनगर में ड्यूटी पर अपनी बटालियन में आमद करानी थी। रविवार रात नौ बजे उसका चचेरा भाई शिवम कार से उसे एयरपोर्ट छोड़ने जा रहा था। भूनी टोल पर पहुंचे तो कार को टोल से निकालने के लिए कपिल ने कर्मचारियों को अपना आईडी कार्ड दिखाया। टोल कर्मचारियों ने उसका आईडी कार्ड व मोबाइल फोन छीन लिया। जब उसने इसका विरोध किया तो सेना के जवान कपिल और उसके भाई शिवम के साथ मारपीट कर दी। मारपीट का वीडियो किसी ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जिसमें साफ दिखाई दे रहा है। टोल प्लाजा कर्मचारी बेरहमी से सैनिक को मार रहे हैं।

सोमवार को सैकड़ों ग्रामीण टोल प्लाजा पर एकत्र हुए और धरने पर बैठ गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने टोल प्लाजा को पूरी तरह फ्री करा दिया और किसी भी वाहन से शुल्क नहीं वसूलने दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने टोल प्लाजा पर जमकर तोड़फोड़ कर दी। कई बैरिकेड्स और खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो गईं। टोल कर्मचारियों में हड़कंप मच गया और कई कर्मचारी मौके से भाग गए।

ग्रामीणों का कहना है कि देश की सुरक्षा में तैनात जवान के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाना बेहद शर्मनाक है। वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारियों की ढिलाई मामले को और गंभीर बना रही है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को हिरासत में लिया। इसके बावजूद ग्रामीणों का गुस्सा कम होने के बजाय और बढ़ गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सेना का जवान सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिकों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। धरना स्थल पर जुटे लोगों ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए। चेतावनी दी कि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो उग्र आंदोलन होगा और इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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