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पुस्तक मेला बना फ्लॉप शो, कई स्कूलों की किताबें नदारद, मायूस लौट रहे अभिभावक

पुस्तक मेला जिस उद्देश्य से लगाया गया था उसे पूरा करता नजर नहीं आ रहा है क्योंकि कई अभिभावकों को उनके स्कूल की पुस्तकें मेले में दिखाई ही नहीं दे रही हैं। जानकारी के मुताबिक केवल सैंतीस स्कूलों की किताबें ही इस पुस्तक मेले में उपलब्ध है जबकि शहर में स्कूलों की संख्या इससे कई गुना अधिक है

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर जिला प्रशासन द्वारा लगाया गया पुस्तक मेला अभिभावकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरता नजर नहीं आ रहा है। कई स्कूलों के अभिभावक इस उम्मीद से पुस्तक मेला पहुंच रहे हैं कि उनको वहां पर उनके स्कूल की किताबें और स्टेशनरी कम कीमत पर मिल जाएंगी। लेकिन ऐसी तमाम स्कूल की किताबें और पुस्तकें पुस्तक मेले से नदारद हैं। जब पुस्तकें नहीं मिल रही है तो मेले में ही लगे शिकायत।शिकायत काउंटर पर अभिभावक अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं और यदि आंकडों मानें तो तीस से अधिक छोटे-बड़े स्कूलों की किताबें पुस्तक मेला में उपलब्ध ही नहीं हैं। और जो अभिभावक यहाँ आ रहे हैं वह परेशान हो रहे हैं। 

पुस्तक मेले का दूसरा दिन रविवार था छुट्टी का। दिन था यह देखते हुए पुस्तक मेला में अभिभावकों की खासी भीड़ दिखाई दी। जिन दुकानदारों पर 5 से 6 स्कूलों की किताबें मिल रही थी उन पर खासी भीड़ थी। अभिभावकों को किताबें लेने के लिए काफी समय देना पड़ रहा था। स्टेशनरी और यूनिफॉर्म खरीदते हुए भी काफी बड़ी संख्या में अभिभावक नजर आए। पुस्तक मेले का सबसे बड़ा आकर्षण रहा बुक।बैंक जहां पर अभिभावकों से किताबें दान करने की जो अपील की गई थी उसका खासा असर देखने को मिला और अभिभावक पंक्तियों में लगकर अपनी किताबें गरीब बच्चों के लिए दान दे रहे थे। 

इन सब चीजों के बावजूद भी पुस्तक मेला जिस उद्देश्य से लगाया गया था उसे पूरा करता नजर नहीं आ रहा है क्योंकि कई अभिभावकों को उनके स्कूल की पुस्तकें मेले में दिखाई ही नहीं दे रही हैं। जानकारी के मुताबिक केवल सैंतीस स्कूलों की किताबें ही इस पुस्तक मेले में उपलब्ध है जबकि शहर में स्कूलों की संख्या इससे कई गुना अधिक है। कई ऐसे अभिभावक इस पुस्तक मेला में पहुंचे जहां पर उनके स्कूल की पुस्तकें उपलब्ध ही नहीं थी और इतना समय खर्च करने के बाद इन अभिभावकों को मायूस होकर पुस्तक मेले से वापस लौटना पड़ा। 

पुस्तक मेला में सबसे बड़ी विसंगति जो अभिभावक बता रहे हैं वह कीमतों को लेकर ही रही क्योंकि अभिभावक जिन पुस्तकों को लेने के लिए मेला में पहुंचे थे वहां पर उन्हें इन पुस्तकों पर किसी भी तरह की छूट नहीं मिली जिससे कि उनकी इस मेले से जो अपेक्षा थी वह पूरी नहीं हुई। कई स्कूलों ने इस पुस्तक मेले से बचने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए हैं कई स्कूलों ने अपना। पीटीएम भी आगे स्थगित कर दिया है और बच्चों का रिजल्ट ही घोषित नहीं किया है। अब हो सकता है कि पुस्तक मेला खत्म होने के बाद प्रशासन की इस मुहिम को खत्म होने के बाद ऐसे स्कूल संचालक अपनी पीटीएम और बच्चों के परिणाम जारी करें और आगे हर साल की तरह अपने यही से पुस्तकें और स्टेशनरी लेने के लिए अभिभावकों को मजबूर करें।

 

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