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कलेक्टर ने किया सिंधिया का पत्र दरकिनार, जर्जर स्कूल भवन में मौत करे इंतजार

ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे केंद्रीय मंत्री संवेदनशीलता दिखाते हुए कलेक्टर को पत्र लिख देते हैं तो उस पत्र लिखे जाने पर भी एक साल तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? क्या सिस्टम इतना संवेदनशूत हो चुका है उसे इन नौनिहालों जो देश का भविष्य हैं उनके जीवन की कोई परवाह नहीं!

ग्वालियर मध्य देश: राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से हुई सात मासूमों की दर्दनाक मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आपके शहर या गाँव में संचालित स्कूल कितने सुरक्षित हैं? और यदि कोई स्कूल ऐसा है जिसमें जर्जर भवन है तो फिर वहां स्कूल संचालित क्यों है? मतलब साफ है प्रशासन लापरवाह है जिम्मेदार अधिकारी सोए हुए हैं और किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। लापरवाही की हद देखिए कि ऐसे ही एक जर्जर स्कूल भवन के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कलेक्टर को पत्र लिखने के बावजूद भी आज तक प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। और वह भी ऐसा जर्जर भवन जिससे पीडब्ल्यूडी ने दस साल पहले जर्जर जर्जर को खतरनाक घोषित कर दिया है। 

जो खबर हम आपको बताने जा रहे हैं उसका उद्देश्य ना तो किसी तरह के राजनीतिक मुद्दे को हवा देना है और न ही किसी अधिकारी पर तंज करना। मुद्दा केवल इतना है कि ये मासूम बच्चे जर्जर स्कूल भवनों में पढ़ने को मजबूर क्यों हैं? और यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे केंद्रीय मंत्री संवेदनशीलता दिखाते हुए कलेक्टर को पत्र लिख देते हैं तो उस पत्र लिखे जाने पर भी एक साल तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? क्या सिस्टम इतना संवेदनशूत हो चुका है उसे इन नौनिहालों जो देश का भविष्य हैं उनके जीवन की कोई परवाह नहीं! या यहां भी प्रशासन झालावाड़ घटना की तरह नौनिहालों की मौत के बाद ही जागेगा? इस स्कूल के जर्जर भवन के मामले में केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने पूरी संवेदनशीलता दिखाई हम समझ सकते हैं कि वह एक बड़े मंत्री हैं। कितनी जगह पत्र लिखे? वहां क्या कार्यवाही हुई? इसका फीडबैक लेने की शायद कोई व्यवस्था उनके पास नहीं होगी!

सवाल यह उठता है कि क्या कलेक्टर कार्यालय जनप्रतिनिधियों द्वारा जनहित के संवेदनशील मुद्दों पर भेजे गए पत्रों को गंभीरता से नहीं लेता? क्या जनप्रतिनिधियों के ऐसे पत्रों को रिकॉर्ड में रख तुरंत कार्रवाई नहीं की जाती? कहीं ऐसा तो नहीं कि जन प्रतिनिधियों के यह पत्र डस्टबिन में डाल दिए जाते हों ठंडे बस्ते में लपेट कर फ़ाइलों में दफन हो जाते हों? और जब बात केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की हो रही हो और उन्हीं के गृहनगर ग्वालियर की हो रही हो जहां उनका सबसे ज्यादा प्रभाव माना जाता है और उस ग्वालियर में भी यदि कलेक्टर द्वारा सिंधिया के पत्र को नजरअंदाज किया गया हो तो इसे आप क्या समझेंगे? 

चलिए मुख्य मुद्दे पर आते है और मुख्य मुद्दा है सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे छोटे बच्चों की सुरक्षा का और शहर में संचालित जर्जर स्कूल भवनों का। कौन सा स्कूल भवन है? कब केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने पत्र लिखा? उस समय कौन कलेक्टर थे? और क्या कार्रवाई होनी थी और क्यों अब तक कार्रवाई नहीं हुई? आइए समझते हैं। हम बात कर रहे हैं शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डबरा की जो डबरा बीच शहर में स्थित है और 2021 में ही पी एम श्री स्कूल के रूप में विकसित किया गया। इस स्कूल का एक भवन जिसमें लगभग आठ कमरे हैं पूरी तरह जर्जर है जिसे 10 साल पहले 2016 में लोक निर्माण विभाग ने जर्जर घोषित करके उस पर सूचना चस्पा की थी कि यह भवन खतरनाक स्थिति में है। इस भवन का उपयोग अभी भी हो रहा है। 

हालांकि इस मामले में जब स्कूल प्रिंसिपल दयानंद भार्गव से हमने बात की तो उनका कहना है कि इस भवन में केवल सामान रखा हुआ है कक्षाओं का संचालन नहीं होता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल में सत्रह सौ से अधिक विद्यार्थी है जो अन्य कक्षों में पढ़ते हैं।वहां जगह की कमी है। इसलिए मजबूरी में दो शिफ्ट में स्कूल लगाना पड़ता है। कई साल से जगह की कमी से जूझ रहे हैं। यह जर्जर भवन भी लोक निर्माण विभाग द्वारा 10 साल पहले जर्जर घोषित होने के बावजूद भी अभी तक खड़ा है। उनके अनुसार यह भवन उपयोग के लायक है और इसमें कक्षाएं लग सकती है। लेकिन उनका यह भी कहना है कि वह यहां कक्षाएं नहीं लगाते। बस सामान रखा हुआ है। 

यह तो है स्कूल की वर्तमान स्थिति अब चलिए ग्वालियर जिला प्रशासन ने जो कारनामा किया वह भी हम आपको बताते हैं। लोक निर्माण विभाग ने दो हजार सोलह में ही भवन को जर्जर घोषित कर दिया। यह स्कूल 2021 में पीएम श्री बन गया। 21 जुलाई 2024 को सिंधी बाज़ार एसोसिएशन ने पत्र लिखकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस जर्जर भवन की स्थिति से अवगत कराया। 4 अगस्त 2024 को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर कलेक्टर को इस भवन को तोड़कर नवीन तीन मंजिला भवन के निर्माण के लिए पत्र लिखा। पत्र में सिंधिया जी ने कितने विनम्र शब्दों में निवेदन किया है यह भी आप नीचे दिए पत्र में पढ़ लीजिए।

मामला इतना गंभीर होने के बावजूद किस तरह यह पत्र अभी तक धरातल पर कार्रवाई के रूप में नहीं उतरा है। जिस समय ग्वालियर कलेक्टर को यह पद लिखा गया उस समय ग्वालियर कलेक्टर के पद पर रुचिका चौहान पदस्थ थी जो वर्तमान में भी ग्वालियर कलेक्टर हैं। केंद्रीय मंत्री सिंधिया अपने पत्र में लिखते हैं कि मै अनुगृहीत होऊंगा यदि आप उक्त संदर्भ में नियमानुसार कार्रवाई करेंगे और साथ ही की गई कार्रवाई से मुझे और आवेदक को अवगत कराएंगे। लेकिन जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की लापरवाही देखिए की आज तारीख तक शिकायतकर्ता चंद्र प्रकाश मेघानी अध्यक्ष सिंधी बाजार एसोसिएशन को किसी तरह से सम्पर्क तक नहीं किया गया। कार्यवाही की जानकारी देना तो दूर की बात है। जबकि चंद्रप्रकाश मेघानी कहते हैं की स्कूल के इस भवन पर साफ लिखा है कि भवन जर्जर है खतरनाक है 5 फिट दूर रहे फिर भी बच्चे वहां खेलते रहते हैं। उन्होंने साफ आरोप लगाया कि प्रशासन सोया हुआ है और किसी बड़ी घटना के बाद ही जागेगा। तो, क्या प्रशासन? बड़ी घटना के बाद ही जागेगा। क्या प्रशासन झालावाड़ जैसी घटना का इंतजार करेगा? क्या प्रशासन केंद्रीय मंत्री सिंधिया के पत्र को गंभीरता से लेकर जर्जर भवन को जमींदोज करेगा? 

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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