ग्वालियर मध्यप्रदेश: शहर में ट्रैफिक की हालत दिन पर दिन बदतर होती जा रही है। शहर में संभवतः ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां जाम की स्थिति दिन में एक न एक बार नहीं बनती हो और जो हॉट स्पॉर्ट हैं वहां के हालात तो ऐसे हैं कि वहां से निकलने में कितना समय लगेगा, इसका अंदाजा भी वहां से निकलने वाले वाहन चालक नहीं लगा सकते। शहर में जिस तरह से हर जगह जाम की स्थिति बन जाती है और ऐसे जाम वाले प्वाइंट लगातार बढ़ते जा रहे हैं, उसमें एक और प्रशासन, पुलिस और नगर निगम दोषी है तो वहीं शहर के आमजन का दोष भी कुछ कम नहीं है।
अमूमन रोज ही किसी न किसी क्षेत्र से किसी न किसी आम नागरिक का फोन आता है कि मेरे क्षेत्र में ट्रैफिक की व्यवस्था बहुत खराब है।जाम लगा रहता है।आप आकर खबर बनाएं। ऐसा ही एक फोन परसों मुरार क्षेत्र से आया उस क्षेत्र में रहने वाले एक व्यापारी ने मुझे बताया कि सात नंबर चौराहे पर बहुत बुरी हालत है।दो बजे का समय है तमाम वाहनों के साथ कई स्कूल बसें जाम में फंसी हुई हैं और रोज यही हालत होती है। आप यहां आकर खबर बनाए।इस स्थिति को सुधारें। यकीन मानिए कि जब कोई व्यक्ति एक पत्रकार को फोन करता है की स्थिति सुधारो, तो हंसी भी आती है और आश्चर्य भी होता है।
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खैर, जब इन सज्जन को मैंने कहा कि जाम के क्या क्या कारण हैं। और जब उनको मैंने बताया कि दुकानदार अपना सामान दुकान से 4 ft आगे रखते हैं, फिर उसके आगे अपना वाहन खड़ा करते हैं। उसके आगे कोई ठेला खड़ा हो जाता है और किस तरह पचास फीट की रोड भी पन्द्रह फीट की रह जाती है। और फिर उनसे पूछा, क्या आप बताएं कि यदि पन्द्रह फीट की बची हुई रोड पर ट्रैफिक जाम हो रहा है तो इसमें आप जैसे आम नागरिक कितने दोषी हैं? उन्होंने रूखा सा जवाब दिया, चलिए कोई बात नहीं। बस यही जवाब समस्या है कि हम स्वयं के अधिकार तो चाहते हैं, लेकिन हमारी कर्तव्य क्या है? एक आम नागरिक की तरह, शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए हमारे स्वयं के कर्तव्य किस तरह स्थिति को काफी हद तक सुधार सकते हैं। इस पर चर्चा करते ही लोग बगलें झांकने लगते हैं।
शहर में यदि ट्रैफिक व्यवस्था सुधारनी है तो आमजन को भी स्वयं की जवाबदेही तय करनी होगी। 1 2 शहर में सड़कों पर अतिक्रमण करना और कहीं पर भी बेतरतीब तरीके से अपने वाहन खड़े कर देना। ट्रैफिक जाम की समस्या को बढ़ाते हैं तो वहीं यकीन मानिए कई सारे वाहन चालक जो लाखों की गाड़ी लेकर खुद को सभ्य और पढ़ा लिखा बताते हुए रोप से वाहन में यात्रा करते हैं उनमें से कई लोगों में ट्रैफिक सेंस शून्य होता है ना?उन्हें लेफ्ट खाली रखने या उपयोग करने का सही सली का पता होता है। और ना ही एक पंक्ति में एक एक के पीछे एक चलकर ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने का। कुछ दिन पूर्व की ही बात है जब जडेरुआ बांध नहरवाली रोड पर केवल एक सज्जन की गलत तरीके से ओवरटेक करके दूसरी तरफ वाहन फंसा देने के चलते ट्रैफिक जाम हुआ।
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आम नागरिक ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।यह ग्वालियर शहर की हकीकत है।लेकिन वहीं दूसरी ओर जो जिम्मेदार कुर्सी पर बैठे हैं, उनका दोष भी कम नहीं है। यदि तमाम व्यस्त बाजारों में दुकानदार कई फुट आगे तक सामान रख देते हैं तो ऐसा नहीं है कि उनका यह कारनामा नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को नहीं पता है, लेकिन यह जानकारी भी सामने आ रही है कि कुछ पैसों की लालच में नगर निगम के कर्मचारी ऐसे स्थानों पर कार्रवाई नहीं करते और जब मामला पूरी तरह बिगड़ जाता है।तो कार्रवाई के नाम पर सबका सामान उठाकर दुर्व्यवहार किया जाता है। क्या इस मामले में ऐसा नहीं हो सकता कि सबसे पहले समझाइश देकर प्रयास किया जाए और जब कोई व्यक्ति बार बार गलती करे तो उस पर अच्छा खासा जुर्माना लगाया जाए।
शहर की जर्जर खस्ता हाल सड़कें भी कहीं न कहीं ट्रैफिक जाम का कारण है। जब सड़कें ही जर्जर होती हैं तो वहां से वाहन चालकों का निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार जर्जर सड़क पर कोई गाड़ी फंस जाने से उसके पीछे अन्य वाहनों की कतार लग जाती है। और कई सड़कों पर गड्ढों से बचने के लिए वाहन चालक इधर उधर बचाने की कोशिश करते हैं जिसके चलते आमने सामने से वाहन फंस जाते हैं। ग्वालियर में बदतर सड़कें कई क्षेत्रों में ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ रही हैं। जहां सड़कों पर जरूरत है वहां डिवाइडर भी नहीं है, कई जगह पर सड़क पर सही ट्रैफिक सूचक नहीं होते हैं। शहर में सही अच्छी क्वालिटी की सड़कें और सही ट्रैफिक सूचना सूचकों के साथ लगी हों तो ट्रैफिक जाम से कुछ हद तक निजात मिल सकती है।
ग्वालियर में ट्रैफिक जाम का एक और बड़ा कारण सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशी हैं। शहर के कई क्षेत्रों में बीच सड़क पर ही मवेशी या तो खड़े रहते हैं या बैठे रहते हैं। जिन सड़कों पर भी मवेशियों का जमावड़ा रहता है वहां से वाहन निकालने में वाहन चालक को खासी मशक्कत करनी पड़ती है और कई बार तो मवेशियों के चलते ही ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है।ऐसे आवारा मवेशियों पर कोई भी मजबूत कार्रवाई करने के लिए प्रशासन और नगर निगम अब तक असफल रहा है। कई जगह पर तो सांड जब आपस में बीस सड़क पर लड़ते हैं तो लंबे समय तक ट्रैफिक थम जाता है क्योंकि साड़ों की लड़ाई के बीच में से निकलने का रिस्क कोई वाहन चालक नहीं लेता है।
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कहीं न कहीं ट्रैफिक जाम के लिए व्यवस्था में बैठे जिम्मेदार दोषी हैं तो उतना ही दोषी आमजन भी हैं। यदि दोनों तरफ से सार्थक प्रयास किए जाएं तो ग्वालियर शहर को इस तरह लग रहे ट्रैफिक जाम से निजात मिल सकता है। इस अव्यवस्थित ट्रैफिक के चलते कई लोगों का समय बर्बाद होता है, जो दूरी दस मिनट में कवर की जा सकती है, उसे कवर करने के लिए तीस मिनट का समय लगता है और कई बार तो यदि जाम बहुत ज्यादा हो तो एक घंटा भी निकल जाता है। प्रतिज्ञा भी इस पूरी समस्या को जब शहर भर में वाहन चलाकर जांच की तो एक हैरान करने वाली बात मुझे दिखाई दी कि गूगल पर जिस रूट पर भी आप चलते हैं और गूगल पर जहां भी मार्ग पर रेड इंडिकेशन होता है वहां आपको भयंकर ट्रैफिक ज़रूर दिखाई देता है। और यहां येलो इंडिकेशन होता है वहां वाहन खिसक खिसक कर चलते हैं यह भी दिखाई देता है। यह उदाहरण इसलिए दे रहा हूं कि यह कौतूहल का विषय है। ग्वालियर शहर में कहाँ कब ट्रैफिक जाम होगा? यह जानकारी गूगल सटीक तरीके से देता है। जब गूगल इतना सब कर सकता है तो फिर ट्रैफिक जाम से आजादी पाने के लिए हम छोटे छोटे प्रयास क्यों नहीं कर सकते?
