Friday, April 17, 2026
34.1 C
Delhi
Friday, April 17, 2026
HomeBig Newsप्रदीप और प्रशासन के लापरवाही की भगदड़, कुबेरेश्वर धाम में दो की...

प्रदीप और प्रशासन के लापरवाही की भगदड़, कुबेरेश्वर धाम में दो की मौत

कुबेरीश्वर धाम में मंगलवार को सुबह 11:30 बजे. मौत होती हैं। इंसानियत को शर्मसार करने वाली तस्वीर तब सामने आती है जब इन दो मौत के बाद भी कार्यक्रम को न तो रोका जाता है नहीं भीड़ को व्यवस्थित करने का कोई इंतजाम किया जाता है

भोपाल /सीहोर मध्य प्रदेश: कुबेरेश्वर धाम में मंगलवार को भगदड़ मच गई। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ मचने से दर्दनाक घटना हो गई। भीड़ में दबने के कारण दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक श्रद्धालु घायल हो गए हैं। सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है. पुलिस के अनुसार, रुद्राक्ष वितरण के समय ये घटना घटी। इस घटना ने एक बार फ़िर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि इस तरह आयोजकों की लापरवाही और प्रशासनिक चूक की भेंट कब तक यह श्रद्धालु चढ़ते रहेंगे?

पंडित प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम में दर्शन के दौरान भीड़ के दबाव के कारण भगदड़ मची। बताया जा रहा है कि भीड़ में महिलाओं की संख्या ज्यादा थी। भगदड़ मचते ही चीखपुकार मच गई. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लियाव घटना के बाद धाम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके अलावा, सवान महीने के कारण भी कुबेरेश्वर धाम में सामान्य से ज्यादा भीड़ चल रही है।

हर भगदड़ हादसा जिस तरह से यह सवाल छोड़ जाता है कि इसकी वजह क्या रही उसी तरह मंगलवार को हुई भगदड़।इसमें दो मौत यह सवाल छोड़ गईं कि इस भगदड़ का दोषी कौन है और इन?दो मौतों की सजा किसको मिलनी चाहिए। रुद्राक्ष वितरण के समय महिलाएं कतार में थीं तभी भगदड़ मच गई। मंदिर के व्यवस्थापक क्या कर रहे थे प्रशासनिक व्यवस्थाएं किस तरह की थीं। कितनी भीड़ आने का अनुमान था? कितनी भीड़ आई?ज्यादा भीड़ आने पर उस हिसाब से व्यवस्थाओं को बदलने की क्या योजना थी। यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब सामने आना चाहिए लेकिन जवाब न तो पंडित प्रदीप शास्त्री देंगे और ना?ही सीहोर प्रशासन!

कुबेरीश्वर धाम में मंगलवार को सुबह 11:30 बजे. मौत होती हैं। इंसानियत को शर्मसार करने वाली तस्वीर तब सामने आती है जब इन दो मौत के बाद भी कार्यक्रम को न तो रोका जाता है नहीं भीड़ को व्यवस्थित करने का कोई इंतजाम किया जाता है। इस हादसे के बाद भी भीड़ बढ़ती रही अफरा तफरी की स्थिति रही पूरा आयोजन राम भरोसे चलता रहा। हादसे के वक्त कुबेरेश्वर धाम में ढाई लाख श्रद्धालु मौजूद थे और शाम होते होते यह संख्या तीन लाख के ऊपर पहुंच चुकी थी। जो शाह बताता है कि संवेदनाएं मर चुकी हैं मानवता खत्म हो चुकी है और मौत के बाद भी लोगों को धर्म की अफीम चटाकर जश्न मनाने पर मजबूर किया जा सकता है।

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular