भोपाल मध्य प्रदेश: जोशी दंपति का मामला तो आपको याद ही होगा मध्यप्रदेश?की एक ऐसी आईएएस जोड़ी जिसमें पति पत्नी दोनों ने मिलकर तीन सौ करोड़ से ज्यादा की अकूत।संपत्ति जमा कर ली थी।यह मामला कई सालों तक सुर्खियों में चला था, साथ ही यह सवाल छोड़ गया था। कि क्या मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारी अधिकारी धन उगाई भ्रष्टाचार और अन्य अवैध तरीकों से चल अचल संपत्ति जोड़ रहे हैं? और अभी हाल ही में केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को ब्योरा मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारियों के अचल संपत्ति के बारे में दिया गया है वह हैरान करने वाला है और कहीं न कहीं वह इस ओर इशारा करता है कि मध्यप्रदेश में तमाम अरविंद जोशी और टीनू जोशी अभी भी सक्रिय हैं।
डीओपीटी की कार्मिक लोक शिकायत कानून और न्याय संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट देश की संसद में पेश की गई इस रिपोर्ट में बताया गया कि दो हजार चौबीस में देश के इक्यानबे आईएएस ने अचल संपत्ति का ब्योरा दिया ही नहीं समिति की सिफारिश है की संपत्ति का ब्योरा दाखिल न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अब आप बड़े सहज तरीके से समझ सकते हैं। ऐसी क्या वजह रही होगी और क्या छुपाने की कोशिश इन आईएएस अधिकारियों ने की होगी कि इन्होंने अपने संपत्ति का ब्योरा तक नहीं दिया। खैर खैर जिन अधिकारियों ने ब्योरा दिया है उसमें भी कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

र्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सौंपी गई। रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान वर्तमान मुख्य सचिव मध्य प्रदेश अनुराग जैन का भोपाल के शिवाजी नगर में 3 करोड के लगभग कीमत का घर है। नोएडा में एक फ्लैट है। जयपुर। में एक फ्लैट है और प्रेम पुरा में 0.05 हेक्टेयर जमीन है। मोहम्मद सुलेमान की बात करें तो भोपाल में बावड़िया कला में डेढ़ करोड़ की जमीन है, नोएडा में एक करोड़ से अधिक कीमत का फ्लैट है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के अपर सचिव डॉ राजेश राजोरा क्या भोपाल के मिंडोरी में चार एकड़, सेमरी में 0.25 एकड, बाज याफ्त में 0.38 एकड और अहमदाबाद में एक कमर्शियल स्पेस है इन सबकी कीमत भी करोड़ों में है। यह लिस्ट बहुत लम्बी है जिसका जिक्र यहां नहीं किया जा सकता।
मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारियों के संपत्ति के मामले में जो खुलासे हुए हैं वह चौंकाने वाले हैं। कई ऐसे आई एएस हैं। जिनके पास आय। से अधिक मात्रा में चल अचल संपत्ति की जानकारी मिली है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ विवेक अग्रवाल के नाम 65 एकड़ कृषि भूमि है दो मकान हैं। एक फ्लैट है तमाम व्यवसायिक संपत्ति है। इन सबकी कीमत कई करोड़ों में है। आईएएस मनीष सिंह भी संपत्ति के मामले में पीछे नहीं हैं। मनीष से हैं के द्वारा दी गई जानकारी में वह जमीन मकान के साथ साथ। टॉकीज और होटल के भी मालिक हैं। मतलब जो जानकारी मिली है उसने मध्यप्रदेश के आईएएस अपनी नौकरी करने के साथसाथ अन्य व्यवसायिक गतिविधियाँ भी चला रहे हैं। होटल भी संचालित कर रहे हैं और टॉकीज भी।

आईएएस अफसरों द्वारा दिए गए संपत्ति के ब्योरे। का विश्लेषण करने पर साफ समझ में आता है। कहीं न कहीं इन अधिकारियों ने अपने नाम तमाम अचल संपत्ति इकट्ठा कर रखी है। अब सवाल यह उठता है मध्यप्रदेश के आईएएस अधिकारी ऐसा क्या कर रहे हैं कि इनके पास अचल संपत्ति के नाम पर तमाम जमीन, मकान और फ्लैट उपलब्ध है। मध्य प्रदेश के एक पूर्व आईएएस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि यदि एक आईएएस अधिकारी ईमानदारी से काम करता है तो अपनी सैलरी के आधार पर इतनी संपत्ति एकत्र कर ही नहीं सकता है। तो क्यों आम जन के लिए लागू की गई जनहितैषी? योजनाओं का कुछ अंश का प्रमाण है, जो आईएएस अधिकारियों की इस अंचल संपत्ति के रूप में परिवर्तित हो गया है?