भोपाल मध्य प्रदेश: प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ॰ मोहन यादव ने एक बार फिर से एक ऐसी घोषणा कर दी है जिसको लेकर पूरे प्रदेश में चर्चाओं। का दौर जारी है। इस बार यह घोषणा है स्कूल शिक्षा को लेकर मौका था। स्कूल चलें हम अभियान के आगाज का और मुख्यमंत्री राजधानी भोपाल के एक बहुत ही प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम विद्यालय केम्पियन में आयोजित राज्य स्तरीय प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में संबोधन दे रहे थे। अंग्रेजी माध्यम स्कूल से संबोधन देते हुए मुख्यमंत्री जी। को अंग्रेज युग की याद आ गई अंग्रेजी नाम। की याद आ गई और उन्होंने सीएम। राइज स्कूल का नाम बदल कर संदीपनी के नाम पर रखने की घोषणा कर दी।
आइए सबसे पहले यह जान लेते हैं कि ऋषि संदीप निक कौन थे और हमारे सनातनिक शैक्षणिक व्यवस्था में उनका क्या महत्व है। संदीपनी अवंति के कश्यप गोत्र में जन्मे ब्राह्मण थे। वे वेद, धनुर्वेद, शास्त्रों, कलाओं और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रकांड विद्वान थे। महर्षि संदीपनी के गुरुकुल में वेद-वेदांतों और उपनिषदों सहित चौंसठ कलाओं की शिक्षा दी जाती थी। साथ ही न्याय शास्त्र, राजनीति शास्त्र, धर्म शास्त्र, नीति शास्त्र, अस्त्र-शस्त्र संचालन की शिक्षा भी दी जाती थी। आश्रम में प्रवेश के समय शिष्यों को गुरु को गोत्र के साथ पूरा परिचय देना होता था। भगवान श्रीकृष्ण, उनके सखा सुदामा और भाई बलराम ने संदीपनी आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी, यहीं श्रीकृष्ण ने पट्टी पर अंक लिखकर धोया था। यहां अंकों का पात होने से इसे अंकपात तीर्थ भी कहा जाता है। गुरु महर्षि संदीपनी श्रीकृष्ण की लगन और मेहनत से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें जगत गुरु की उपाधि दी। तभी से श्रीकृष्ण पहले जगत गुरु माने गए।

संदीपनी परम तेजस्वी तथा सिद्ध ऋषि थे, संदीपनी का अर्थ ‘देवताओं के ऋषि’ होता है। उज्जैन ऋषि संदीपनी की तप स्थली रही। यहां महर्षि ने घोर तपस्या की थी। इसी स्थान पर महर्षि संदीपनी ने वेद, पुराण, शास्त्रादि की शिक्षा हेतु आश्रम का निर्माण करवाया था। महाभारत, श्रीमद्भागवत, ब्रह्मपुराण, अग्निपुराण तथा ब्रह्मवैवर्तपुराण में संदीपनी आश्रम का उल्लेख मिलता है। गुरु संदीपनी अवंति के कश्यप गोत्र में जन्मे ब्राह्मण थे। वे वेद, धनुर्वेद, शास्त्रों, कलाओं और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रकांड विद्वान थे। महर्षि संदीपनी के गुरुकुल में वेद-वेदांतों और उपनिषदों सहित चौंसठ कलाओं की शिक्षा दी जाती थी। साथ ही न्याय शास्त्र, राजनीति शास्त्र, धर्म शास्त्र, नीति शास्त्र, अस्त्र-शस्त्र संचालन की शिक्षा भी दी जाती थी।
निस्संदेह ऋषि संदीपनी का सनातनी शिक्षा व्यवस्था में जो महत्व है उसको कोई छू नहीं सकता। और उन्होंने जो शिक्षा व्यवस्था बनाई थी वह काफी लंबे समय तक भारत में चलती रहीं लेकिन विदेशी आक्रांताओं के आने के बाद वह धीरे धीरे क्षीण होने लगी और अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था स्थापित होने के बाद तो वह पूरी तरह से खत्म ही हो गई। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सीएम राइज स्कूल का नाम संदीप ने विद्यालय रखने की घोषणा की है। तो, क्या हम यह मान लें? वहीं व्यवस्थित अनुशासित समर्पित सनातनी शैक्षणिक व्यवस्था की स्थापना मध्यप्रदेश में होने वाली है? क्या मात्र नाम बदल लेने से शैक्षिक व्यवस्था में यह क्रांतिकारी परिवर्तन आ पाएगा?
अब यहां पर सवाल यह उठता है कि अंग्रेजियत और अंग्रेजी से दूर भारतीय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी प्रयासरत थे। और यही देखते हुए उन्होंने इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई भी हिंदी में शुरू कराई थी और यह पढ़ाई हिंदी में शुरू कराने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य था। यह बात तो शिवराज सिंह को भी पता होगी कि सीएम राइस एक अंग्रेज़ी नाम है लेकिन क्या वह नाम से ज्यादा व्यवस्था को बदलने में विश्वास रखते थे। क्योंकि उनके द्वारा पूरे प्रदेश में सीएम राय स्कूल खोलकर बच्चों को सरकारी स्कूल में ही उच्च स्तरीय शिक्षा व्यवस्था प्रदान करना वास्तव में एक ऐतिहासिक वह सराहनीय कदम है। अब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उनके द्वारा घोषित किए गए सीएम राइज स्कूल का नाम बदलकर कहीं उनको ही चुनौती तो नहीं दे डाली है?

आपको बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सीएम राइज स्कूल का नाम बदलकर संदीपनी विद्यालय करना मुख्यमंत्री डा मोहन यादव का ऐसा पहला काम नहीं है जो उन्होंने शिवराज सिंह के फैसले को बदलते हुए किया हो, ऐसी और भी कई घोषणाएं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव कर चुके हैं। यदि शिक्षा के क्षेत्र की ही बात करें तो तमाम कार्यक्रमों में मध्य प्रदेश गान के दौरान खड़े होने की अनिवार्यता कर नियम शिवराज सिंह चौहान ने लागू किया था। और डॉ॰ यादव इस नियम को भी पहले ही खत्म कर चुके हैं। और इस समय प्रदेश गान के दौरान आप बैठे रह सकते हैं खड़े होना जरूरी नहीं है।
अब सवाल यह खड़ा होता है कि एक ही विचारधारा से आने वाले दो? मुख्यमंत्रियों के विचारों में इतना अंतर क्यों? और सवाल यह भी है के ऋषि।संदीपनी का नाम दिए जाने के बाद क्या यह विद्यालय उस स्तर के संस्कार और अनुशासन छात्रों को देने में कामयाब हो पाएंगे या केवल अंग्रेजी नाम बदल कर अंग्रेज़त को भूल जाने के एक छद्म वातावरण में हम आगे भी जीते रहेंगे?