ग्वालियर मध्य प्रदेश: गुरुवार सुबह साढ़े नौ बजे का वक्त था और कलेक्टर के तमाम कार्यालय खोले जा रहे थे। उसी समय कलेक्टर के लगभग आधे परिसर में शार्ट सर्किट हो गया, जगह जगह ब्लास्ट होने लगे। कहीं पंखे फटे। एमसीबी बॉक्स, कहीं कम्पटर। ट्रेजरी ऑफिस के बिजली बोर्ड में शार्ट सर्किट से आग लग गई महिला। बाल विकास ई गवर्नेंस खनिज खाद्य नागरिक आपूर्ति, स्थानीय निर्वाचन जैसे तमाम विभागों में पंखे कंप्यूटर और कई उपकरण धमाके के साथ फूँक गए। स्थानीय निर्वाचन के कक्ष में शार्ट सर्किट से आग लग गई लेकिन कर्मचारियों की मुस्तैदी के चलते। तुरंत ताला। तोड। अग्निशमन यंत्रों से आग पर काबू पा। लिया गया।थोड़ाबहुत रिकार्ड ही चल सका लेकिन। आपको जल्दी बुझा लिया गया जिससे ज्यादा हानि नहीं हुई।
शॉर्ट सर्किट की वजह हालांकि ट्रांसफार्मर पर ओवरलोड होना बताया जा रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतने आवश्यक और जिला कलेक्टर के कार्यालय में ओवरलोड किस लापरवाही की वजह से हुआ। ओवेन लोड का जो सबसे बड़ा कारण निकलकर आ रहा है वह यह है की तमाम विभाग अपने मनमर्जी से बिजली उपकरण लगा लेते हैं जिसकी सूचना भी कलेक्टर को नहीं दी जाती है। यदि ठंड की बात करें तो तमाम कार्यालय में रूम ही दिखाई देते हैं। गर्मी की बात करें तो तमाम कार्यालय ने बिना अनुमति के ए.सी लगा रखे हैं। पूरे कलेक्टर कार्यालय में 80 के ऊपर एसी लगे हुए हैं। इनमें से कई ऐसी बिना अनुमति के लगाए गए हैं जिसके वजह से कलेक्ट्रेट कार्यालय में लगे ट्रांसफार्मर पर। लोड बढता जा रहा है। मतलब शहर के सबसे जिम्मेदार विभाग के गैर जिम्मेदाराना रवैये का सीधा-सीधा उदाहरण यहां देखने को मिल रहा है।

अब इस पूरी लापरवाही में आप बिजली विभाग के कारनामे पर भी नज़र डालिए। शॉर्ट सर्किट के बाद मौके पर पहुँचे असिस्टेंट इंजीनियर एसके गुप्ता अपने विभाग की तरफ से सफाई देते हुए वहां यह बताते नजर आए की गिलहरी के कारण स्पष्ट हो गया है जिसके कारण शौक सर्किट हुआ कलेक्टर और अपर कलेक्टर को उन्होंने वहाँ से एक मरी हुई गिलहरी भी निकाल कर दिखा दी। और अपने विभाग की लापरवाही से पल्ला झाड़ लिया। अब आप समझिए कि बिजली विभाग की लापरवाही यहां है क्या। वैसे तो शहर के कई क्षेत्रों में ओवरलोडिंग की समस्या है। ओवरलोडिंग के चलते इस तरह की घटनाएँ होती हैं वहां पर ट्रांसफार्मर जिस लोड के लिए हैं उससे ज्यादा लोग ट्रांसफार्मर झेल रहे हैं जिसकी वजह से क्षेत्र की जनता को खामियाजा भुगतना पड़ता है।
अब सवाल उठता है कि क्या क्लिक तक कार्यालय में लगे ट्रांसफार्मर उस? लोड के लिए पर्याप्त थे जितना लोड कलेक्टर कार्यालय के विभिन्न उपकरण से ट्रांसफार्मर पर पहुंच रहा है। और यहीं पर बिजली विभाग की लापरवाही उजागर होती है। कलेक्टर परिसर में 215 केवीए के 4 ट्रांसफार्मर लगे हैं। लेकिन कलेक्टर कार्यालय के विभिन्न ऊर्जा उपयोग का आकलन करें। तो यह ट्रांसफार्मर पर्याप्त नहीं हैं यह इन पर आने वाले अपेक्षित लोड से कम हैं। और यह समस्या स्वयं कलेक्टर रुचिका चौहान की जानकारी में होने के चलते उन्होंने बिजली कंपनी को ट्रांसफार्मर बदलकर 315 केविए के चार ट्रांसफार्मर लगाने के लिए दो बार पत्र भी लिखे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान पहला पत्र 25 जून, 2024 को पूर्व संभाग के डीजीएम को लिखा जिसमें उन्होंने ओवरलोड होने के चलते कलेक्टर परिसर में लगे 215 केवीए के ट्रांसफार्मर की जगह 315 केवीए के ट्रांसफार्मर लगाने के लिए कहा। लेकिन जिले के मुखिया कलेक्टर के इस पत्र को शायद डीजीएम ने कचरे के डब्बे में डाल दिया। इसके बाद कलेक्टर ने दूसरा पत्र सिटी सर्किल के महाप्रबंधक नितिन मांगलिक को 19 दिसंबर 2024 को लिखा था। इस पत्र को लिखे भी तीन महीने गुज़र गए लेकिन बिजली विभाग की हठधर्मिता कहें लापरवाही कहें दुस्साहस कहें या तानाशाही कहें, लेकिन ज़िले के मुखिया कलेक्टर रुचिका चौहान के पत्र को भी बिजली विभाग ने कोई तवज्जो नहीं दी।