कई बार हम पूजा पाठ करते हैं और लंबे समय के बाद भी हमें मनचाहा फल प्राप्त नहीं होता है। उस समय हमारे मन में कई तरह के ख्याल आते हैं कई बार। तो हम पूजा की विधि भी को लेकर भी संशय में रहते हैं। लेकिन जब पूजा की विधि भी सही हो और जो बाकी की प्रक्रिया भी अपनाई गई हो वह सभी वेद पुराणों में वर्णित व्यवस्था के अनुरूप ही हो और उसके बाद भी यदि आपको अपने पूजा पाठ।का मनचाहा लाभ नहीं मिल रहा हो तो फिर ऐसे में क्या करना चाहिए यह ख्याल आप लोगों के मन में अवश्य आता होगा।
सनातन परंपरा के अनुसार और जो हमारे पुराने ग्रंथ हैं उनकी भी माने तो ऊंचा पाठ सही समय पर होना अत्यंत आवश्यक है। शास्त्रों में सूर्योदय के समय को पूजा-पाठ के लिए सबसे उत्तम माना गया है। यह वह समय होता है, जब व्यक्ति का शरीर और मन दोनों ही अपने शुद्धतम स्तर पर होते हैं। ऐसे में व्यक्ति अधिक ध्यान लगा सकता है और उसकी आधात्मिक ऊर्जा भी अधिक होती है। यही कारण है कि इस समय आपको भगवान का ध्यान और पूजा करने से अधिक लाभ मिल सकता है और आपकी प्रार्थना जल्दी स्वीकार होती है।
सूर्योदय के साथ साथ संध्याकाल यानी शाम का समय, जिसे गोधूलि बेला भी कहा जाता है, उसे भी भगवान की पूजा-अर्चना के लिए काफी खास माना गया है। वेदों के अनुसार इस समय को बहुत ही पवित्र माना गया है, क्योंकि यह समय दिन और रात की संधि का समय है। ऐसे में अगर आप इस समय पर भगवान का ध्यान या पूजा-अर्चना करते हैं, तो इससे भी आपको काफी लाभ देखने को मिल सकता है।

शास्त्रों में यह भी वर्णित है के किस समय पूजा करने से आपको इसका कोई लाभ नहीं मिलता। कभी भी दोपहर के समय भगवान की पूजा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस समय अभिजीत मुहूर्त होता है, जिसे पितरों का समय माना जाता है। ऐसे में इस समय अगर आप पूजा-पाठ करते हैं, तो आपको उसका पूर्ण फल नहीं मिलता। इसी के साथ दोपहर का समय भगवान के विश्राम का समय भी माना जाता है, इसलिए भी इस समय में पूजा करना शुभ नहीं होता।
हम अपने पाठकों को बता दें कि विशेषज्ञ ब्राह्मणों द्वारा बताई गई जानकारी के आधार पर हमने यह विचार आपसे साझा किया है। पूजा पाठ से निश्चित ही सुखद परिणाम प्राप्त होते हैं फिर भी यदि आप पूजा पाठ। की सही विधि और सही समय को लेकर और भी अधिक व्यवस्थित होना चाहते हैं, तो किसी नजदीकी ब्राह्मण से जरूर संपर्क करें और सही विधि।विधान और समय की जानकारी लें। हमारे द्वारा दी गई जानकारी एक सामान्य जानकारी है। हो सकता है राशि के अनुसार ग्रह के अनुसार भी कुछ परिवर्तन आपके लिए आवश्यक हो। जो कोई कुशल ब्राह्मण या ज्योतिष शास्त्री ही बता सकते हैं।