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मराठा बोर्डिंग में श्री मद्भागवत के छंठवे दिन हुआ कृष्ण रुक्मणी विवाह

महाराष्ट्र हितचिंतक सभा द्वारा कैलाश वासी माधवी राजे सिंधिया की स्मृति में आयोजित भागवत कथा ने शुक्रवार को गोपीगीत की कथा का रसपान कराते हुए लाड़ली सरकार ने कहा कि गोपियां साधारण स्त्रियां नहीं थीं। साधु संतों को कठिन तप के बाद गोपी के रूप में प्रभु का सानिध्य एवं भक्ति का अवसर मिला

ग्वालियर, मध्य प्रदेश: मराठा बोर्डिंग में आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के छंठवे दिन भगवान श्रीकृष्ण एवं रुकमणि विवाह के सुंदर प्रसंग में भक्तों ने उत्साहपूर्वक शिरकत की। इस मौके पर परीक्षत वंदना पांडुरंग राव कदम ने व्यासपीठ का पूजन किया। अन्ना महाराज पीठ से धर्मगुरु मनीष अन्ना महाराज ने भी व्यास पीठ का पूजन कर लाडली सरकार को आशीर्वाद प्रदान किया। भगवान के उत्सव में शामिल होने से मिट जाते हैं विकार, मराठा बोर्डिंग में श्रीमद्भागवत के छंठवे दिन हुए कृष्ण रुक्मणी विवाह, कृष्ण के वृंदावन छोड़ने का वृत्तांत सुनाते हुए रो पड़ी कथा वाचिका लाड़ली सरकार।

कथा व्यास सुधि उपाध्याय लाड़ली सरकार ने इस मौके पर कथा रस की वर्षा करते हुए कहा कि भगवान के उत्सव में शामिल होने से जीवन के सभी विकार मिट जाते हैं, इसलिए जब भी मौका मिले जहां भी भगवान का उत्सव मनाया जा रहा है, वहां कुछ देर रुककर जरूर आनंद लेना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा के छठें दिन और रुक्मणि का विवाह भी संपन्न हुआ। इस अवसर पर धूमधाम से श्री कृष्ण भगवान की बारात निकाली गई।

महाराष्ट्र हितचिंतक सभा द्वारा कैलाश वासी माधवी राजे सिंधिया की स्मृति में आयोजित भागवत कथा ने शुक्रवार को गोपीगीत की कथा का रसपान कराते हुए लाड़ली सरकार ने कहा कि गोपियां साधारण स्त्रियां नहीं थीं। साधु संतों को कठिन तप के बाद गोपी के रूप में प्रभु का सानिध्य एवं भक्ति का अवसर मिला। गोपी-कृष्ण का मिलन पिता-पुत्री के मिलन जैसा पवित्र था। उन्होंने कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। गोपियों ने अपने भक्तिभाव से भगवान को प्रगट होने के लिए मजबूर कर दिया। गीता के एक अध्याय के बराबर गोपियों का एक एक श्लोक है। भगवान को आज भी भाव से पुकारो तो वह अवश्य प्रकट होते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। गोपियों ने अपने भक्तिभाव से भगवान को प्रगट होने के लिए मजबूर कर दिया। गीता के एक अध्याय के बराबर गोपियों का एक एक श्लोक है। भगवान को आज भी भाव से पुकारो तो वह अवश्य प्रकट होते हैं। इस मौके पर अध्यक्ष बलराज शिंदे कार्यक्रम संयोजक संग्राम कदम धर्मेन्द्र गायकवाड़, अजय सालुंके, संजय फड़तरे, प्रताप महाडिक, पवन पवार, इंद्रजीत गायकवाड़, रंजीत सुर्वे, मनोज मोरे, जितेन्द्र घाटगे, सुरेश शिंदे सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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