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जिला शिक्षा विभाग और अजय कटियार की लापरवाही से हो रहे चैतन्य टेक्नो स्कूल जैसे हादसे, मिली भगत उजागर!

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के बौड़ापुर क्षेत्र में स्थित श्री चैतन्य टेक्निक स्कूल की चौथी मंजिल से गिरकर छात्र ज्योदित्य तोमर घायल हो जाता है। शुरुआत में स्कूल प्रबंधन इस घटना को छुपाने के तमाम प्रयास करता है। लेकिन दिन पे दिन इस स्कूल के लापरवाही की परतें खुलती जाती हैं। और साथ में परतें खुलती हैं उन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की जो इस तरह के स्कूलों को संरक्षण देने का काम करते हैं। इस स्कूल में छात्र गिरने में। प्रबंधन की लापरवाही के बावजूद प्रबन्ध सीना ताने खड़ा है। और स्कूल प्रबन्धन को शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन का कोई डर नहीं है। इसकी हकीकत तब सामने आ जाती है। जब खुलेआम यह स्कूल श्री चैतन्य टेक्नो। स्कूल का। बोर्ड हटाकर उसकी जगह पर द मानवेन्द्र ग्लोबल स्कूल का बोर्ड लगा देता है। और बदलाव पर जिला शिक्षा अधिकारी इस बदलाव पर स्कूल प्रबंधन को संरक्षण देने वाला जवाब देते हुए कहते हैं कि स्कूल पर कार्रवाई करना सीबीएसई के हाथ में है। 

आपको बता दें कि सोमवार को इस स्कूल प्रबंधन की लापरवाही और उसके बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन के संरक्षण को देखते हुए छात्र ज्योदित्य तोमर के परिजनों ने बहोड़ापुर थाने का घेराव किया। परिजनों का साफ कहना है की प्रबंधन की लापरवाही से छात्र की जान आफ़त में है। प्रबंधन द्वारा परिजनों को गुमराह किया गया। जिसके चलते समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल सका। यह प्रबंधन की गंभीर लापरवाही है। छात्र के घर वाले स्कूल प्रबंधन पर। एफआईआर की माँग पर अड़े हैं। इसके बाद घरवालों ने प्रबंधन के खिलाफ पुलिस में शिकायती आवेदन दिया। जिस पर टीआई जितेंद्र सिंह तोमर और सी एस पी आयुष गुप्ता स्कूल कैम्पस में जाँच के लिए पहुँचे। लेकिन ऐसा माना जाता है। कि जब घटना होती है उसी समय साक्ष्य उपलब्ध होते हैं। तत्काल जांच की जाए तो तमाम हकीकत सामने निकलकर आती हैं। अब घटना के इतने दिनों के बाद जब स्कूल प्रबंधन सारी लीपा-पोती कर चुका होगा। अब इस जांच में क्या निकलकर सामने आएगा। इसमें संदेह होना लाजिमी है। 

इतनी बड़ी घटना के बाद भी इस स्कूल प्रबंधन को शिक्षा विभाग और प्रशासन का किसक। तरह संरक्षण मिला हुआ है इसका उदाहरण उस समय सामने आ गया। जब चालाकी। दिखाते हुए उच्च अन्य अभिभावकों को गुमराह करते हुए इस स्कूल प्रबंधन ने अपने मुख्य बिल्डिंग पर श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल। का बोर्ड हटा कर द मानवेंद्र ग्लोबल स्कूल का बोर्ड लगा दिया। जब इस परिसर में पुलिस जांच करने पहुंची थी तब यह बोर्ड बदला हुआ था। इसी बात से आप समझ सकते हैं कि स्कूल प्रबंधन की। पेट कितनी गहरी होगी। क्योंकि कोई आम संस्थान होती। तो पुलिस इस बदलाव पर ही लंबी चौड़ी कार्यवाही कर देती। जब बोर्ड बदला जा सकता है तो अंदर इतने दिनों में क्या कुछ बदला गया होगा, यह भी एक बड़ा सवाल है। 

अब हम आपको वह हकीकत बताते हैं जो साफ प्रमाण दे रही है कि किस तरह जिला शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का संरक्षण इस स्कूल के प्रबंधन को मिला हुआ है। इस स्कूल के प्रबंधन और बीआरसी के बीच बातचीत का एक ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें यह दावा किया जा रहा है। यह बात बातचीत इस स्कूल के प्रबंधन और स्कूल शिक्षा विभाग के बीआरसी के बीच हुई बातचीत का है। इस बातचीत में जिला शिक्षा विभाग के उन जिम्मेदारों और स्कूल प्रबंधन के बीच की सांठगांठ साफ उजागर हो रही है। इस बातचीत में बीआरसी स्कूल प्रबंधन से बातचीत करके स्कूल में जाँच के लिए आने का समय फिक्स कर रहे हैं। स्कूल में आने का उचित समय पूछ रहे हैं और स्कूल प्रबंधन बीआरसी। को दूसरे दिन। आने के लिए कहता है और साथ ही अपनी कार उन्हें लेने के लिए भेजने की बात भी। कहता है और इस पर बी आर सी भी कार का उपयोग करने के लिए सहमत हो जाते हैं। यदि यह वायरल ऑडियो एक हक़ीक़त है तो यकीन मानकर चलिए यह एक बड़ा प्रमाण है कि किस तरह जिला शिक्षा अधिकारी और विभाग के अन्य अधिकारियों का संरक्षण इस स्कूल प्रबंधन को मिला हुआ है। 

आपको बता दें ऐसे तमाम स्कूलों के तमाम शिकायती प्रकरण जिला शिक्षा विभाग में लंबित हैं, जिस पर जिला शिक्षा अधिकारी अजय कटियार कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। सूत्रों से जानकारी मिली है कि कई अन्य स्कूलों में भी छात्रों के प्रताडना की शिकायतें जिला शिक्षा अधिकारी के पास पहुंची हैं लेकिन उन्हें गंभीरता से न लेते हुए उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यदि बात श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल की करें इस स्कूल के खिलाफ भी अधिक फीस वसूलने और कॉपी और ड्रेस के नाम पर धन उगाही की शिकायतें जिला शिक्षा विभाग में हैं। अभिभावकों ने सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से इस स्कूल की शिकायत की थी लेकिन उन शिकायतों पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिला शिक्षा अधिकारी विभाग के ही अन्य अधिकारियों का यह ढुलमुल रवैया साफ बताता है। की इन निजी स्कूलों को विभाग का संरक्षण प्राप्त है और यदि इसी तरह यह संरक्षण आगे जारी रहा और विभाग ने छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की तो आगे भी ऐसी ही घटनाएं हों इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। और हाँ आखिर में एक हकीकत, यदि किसी रसूखदार,  या किसी माननीय के बच्चे के साथ यह घटना होती तो तत्काल स्कूल पर प्रशासन के ताले लग गए होते!

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