तलाक तलाक तलाक, यही नाम था 35 साल पहले बनी इस फ़िल्म का

तलाक तलाक तलाक, जब सन 1982 में मुस्लिम महिलाओं पर बनी एक फ़िल्म का नाम ये रखा गया तो उस समय इसका विरोध लाज़मी था। फिल्म तीन तलाक मुद्दे को लेकर बनाई गई है, जो मुस्लिम महिलाओं से जुड़े हर तथ्य को बखूबी दिखाने का प्रयास है।

निर्माता-निर्देशक बीआर चोपड़ा (बलदेव राज चोपड़ा) की 35 साल पहले रिलीज हुई फिल्म ‘निकाह-ए-हलाला’ के गानें और डायलॉग्स आज भी हर शख्स के जहन ज़िंदा हैं। सामाजिक मुद्दों, कानून के बारीक पहलुओं समेेत मुस्लिम समाज से जुड़े विषय को फिल्म ‘निकाह-ए-हलाला’ के जरिये रुपहले पर्दे पर उतारने के लिए बी आर चोपड़ा की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। उनके सिवा इंडस्ट्री में शायद ही कोई इसे दिखाने की हिम्मत जुटा पाता।

आप को बड़ा अजीब लग रहा होगा कि क्या फ़िल्म के इतने सामान्य नाम पर विवाद हो सकता है लेकिन फिल्म का नाम पहले ‘तलाक तलाक तलाक’ था, लेकिन करोड़ों मुस्लिम मह‍िलाओं का तलाक न हो जाए, ओर किसी भी विवाद में फ़िल्म रुक न जाये इस डर से बीआर चोपड़ा ने इस फिल्म का नाम बदलकर ‘निकाह-ए-हलाला’ कर दिया।

साल 1982 में आई डायरेक्टर बी आर चोपड़ा की फिल्म को रिलीज हुए 35 साल पूरे हो गए हैं। अभिनेता राज बब्बर, सलमा आगा और दीपक पराशर के अभिनय से सजी फिल्म ‘निगाह’ के डायलॉग्स आज भी लोगों के जहन में ज़िदा हैं। शरिया कानून पर आधारित फिल्म ‘निकाह’ में हैदर (राज बब्बर) और निलोफर (सलमा आगा) कॉलेज में साथ-साथ पढ़ते हैं। हैदर एक जाना माना कवि है।फिल्म में राज बब्बर के शायराना अंदाज के मानो सभी कायल हो गए हों।

इस फ़िल्म के 35 साल बाद मुस्लिम महिलाओं के लिए एक ऐसा कानून देश मे बनने जा रहा है। जो इस फ़िल्म के मुद्दे को ताजा करता है। सालो से एक तरफा कानून का दंश झेल रही महिलाएं कब से मोन रहकर अपने हक का इंतज़ार कर रही थी।

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