शेजवलकर का संसद मै पहुंचना, राजनीति में एक नए अध्याय का प्रारम्भ

भारतीय राजनीति का सबसे कुरूप चेहरा जिसे जनता जानती है ओर मानती है। वह है आपराधिक प्रवति के लोगो का राजनीति में सफल होना। जनता मजबूर होते हुए भी सालो से ऐसे प्रत्याशी को चुनते आ रही है। लेकिन वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने अपनी राय वोट के रूप में देकर एक परिवर्तन की आधारशिला रखी है। बडे बडे पोलिटिकल पण्डित जनता की सोच को नही पकड़ पाए।

जहां पूरे देश ने मोदी को स्वीकार किया वही ग्वालियर की जनता ने विवेक नारायण शेजवलकर पर अपना विश्वास जताया। मोदी और शेजवलकर में जनता ने जो गुण देखे वह लगभग समान है। दोनो ही ईमानदार व कर्मठ व्यक्ति है। शेजवलकर इतने सरल व सहज हैं कि उनकी तुलना चुनाव के दौरान स्वर्गीय मनोहर पर्रिकर से भी की गई। दोनों का दुपहिया वाहन पर बैठे फ़ोटो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय रहा। जिस शेजवलकर को ग्वालियर के पोलिटिकल पण्डित व वरिष्ठ पत्रकार कमजोर प्रत्याशी मानकर चल रहे थे। उन्ही शेजवलकर की स्वच्छ छवि ने ऐसे कथित बुद्धिजीवियों का मुंह सिल दिया है। शेजवलकर के टिकिट की घोषणा के वक्त कई ऐसे पंडितो ने इसे कांग्रेस केलिए वॉक ओवर तक बता दिया था। लेकिन शांत स्वभाव के विवेक शेजवलकर ने अपना विवेक कभी नही खोया। और अपने नाम को चरितार्थ किया।

भारतीय राजनीति का परिदृश्य बदल रहा है। लोग ईमानदार प्रत्याशी को चुनना चाहते रहे हैं औऱ अब वह ऐसा ही कर रहे हैं। ग्रामीण मतदाता शहर के कथित हाई स्टेटस मतदाता से ज्यादा समझदार प्रतीत हो रहा है। गुंडे माफिया व अपराधी प्रवति के नेताओ को जनता नकार रही है। भारतीय राजनीति का चेहरा सुधारने का प्रारंभ जनता कर चुकी है। उम्मीद है कि राजनीतिक पार्टियां इस उदाहरण से सबक लेंगी ओर स्वच्छ छवि के लोगों को मौका देंगी।

 

 

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